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सीएम योगी आदित्यनाथ बोले- सनातन की छाया में सभी सुरक्षित, जाति-भाषा के नाम पर बांटने वालों में रावण की आत्मा

गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा सभी जातियों, संप्रदायों और मत-मजहबों को सुरक्षा तथा समान अवसर देने का संदेश देती है। उन्होंने जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोग देश की एकता और मजबूती से परेशान हैं। मुख्यमंत्री मंगलवार शाम मानसरोवर रामलीला मैदान में श्री श्री रामलीला समिति, आर्यनगर की ओर से आयोजित भगवान श्रीराम के राजतिलक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए समाज से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और नशामुक्ति के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

भारत मजबूत होता है तो मिलता है मोदी जैसा नेतृत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भारत कमजोर होता है, तब उसकी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ और सोमनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की मजबूती उसकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की रक्षा के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जब भारत मजबूत होता है तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व मिलता है और देश अपनी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण इसी संकल्प का उदाहरण है।

राम मंदिर और अयोध्या को लेकर दुष्प्रचार का आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो ताकतें भारत को कमजोर करना चाहती हैं, उन्हें अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, दीपोत्सव और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का पुनर्जीवन पसंद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अयोध्या के बारे में भ्रम और दुष्प्रचार फैलाते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान रामभक्तों पर हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कुछ लोग राम का नाम लेते हैं, लेकिन उनके पुराने आचरण को भी याद रखना चाहिए। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों को पहचानने और समाज को बांटने वाली गतिविधियों से सावधान रहने की अपील की।

‘देश है तो धर्म है और धर्म से हम सब’

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा और एकता सभी नागरिकों के हित में है। उनके अनुसार, जब तक भारत सुरक्षित और मजबूत रहेगा, तभी समाज के विभिन्न वर्गों की परंपराएं और अधिकार भी सुरक्षित रह सकेंगे।

उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक और वैचारिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा सभी समुदायों के साथ रहने और आगे बढ़ने का संदेश देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ को इसी भावना से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा का मूल भाव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ है।

रावण के दस सिरों को बताया बुराइयों का प्रतीक

विजयादशमी के अवसर पर मुख्यमंत्री ने रावण के दस सिरों को समाज में मौजूद बुराइयों का प्रतीक बताया। उन्होंने अधर्म, असत्य, अन्याय, अत्याचार, अमर्यादा, भ्रष्टाचार, दुराचार, भ्रम, दुष्प्रचार और नशे को ऐसी प्रवृत्तियां बताया, जिनके खिलाफ समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने रावण का अंत कर रामराज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया था। इसी तरह वर्तमान समय में समाज और राष्ट्र की प्रगति में बाधा बनने वाली बुराइयों का विरोध करना जरूरी है।

सत्ता नहीं, संकल्प से बना राम मंदिर

मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि रामभक्तों के पास उस समय सत्ता नहीं, बल्कि संकल्प था। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की आशा बनाए रखी। उन्होंने कहा कि सनातन समाज की एकजुटता ने इस संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जी के कथन ‘राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम’ का उल्लेख करते हुए लोगों से समाज और राष्ट्र के हित में अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की।

नशे के खिलाफ सरकार के साथ समाज भी आए आगे

मुख्यमंत्री ने नशे को युवा पीढ़ी और समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ कार्रवाई करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उनकी संपत्तियों को जब्त करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने परिवारों, मोहल्लों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अपने आसपास नशे के कारोबार और युवाओं को इसकी गिरफ्त में धकेलने वाली गतिविधियों को पनपने न दें। उनके अनुसार, युवाओं को नशे से बचाने के लिए सामाजिक जागरूकता और सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

रामलीलाएं सामाजिक समरसता का देती हैं संदेश

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामलीलाएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का माध्यम भी हैं। गांवों में राम, लक्ष्मण, भरत, सीता, हनुमान, सुग्रीव, अंगद, शबरी और निषादराज जैसे पात्रों की भूमिका स्थानीय लोग निभाते हैं। इस प्रक्रिया में समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ आते हैं और साझा परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

उन्होंने कहा कि रामलीला में किसी पात्र की जाति नहीं पूछी जाती, बल्कि उसके अभिनय, संवाद और योगदान को महत्व दिया जाता है। यह परंपरा समाज को जोड़ने और समानता का संदेश देने का काम करती है। मुख्यमंत्री ने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन से बचने तथा राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील की।

परिवार के साथ समय बिताने और परंपराओं को जानने की अपील

मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को परिवार के लिए समय निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ही घर में रहने के बावजूद कई बार परिवार के सदस्य सोशल मीडिया और अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में परिवार के साथ बैठने, धार्मिक ग्रंथों और महापुरुषों की जीवनियों को पढ़ने तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कैलाश मानसरोवर, बदरीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथपुरी, द्वारकापुरी, कन्याकुमारी, रामेश्वरम और धनुषकोटि जैसे प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की यात्रा करने का भी सुझाव दिया। उनके अनुसार, ऐसे स्थानों की यात्रा से बच्चों को भारतीय परंपराओं और इतिहास को समझने का अवसर मिलता है।

रामराज्य की अवधारणा पर आधारित हैं सरकारी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य ऐसा समाज बनाना है, जहां गरीबों को बुनियादी सुविधाएं मिलें, लोगों को सम्मान मिले और अन्याय-अत्याचार के लिए कोई जगह न हो। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, बिजली कनेक्शन, रसोई गैस कनेक्शन और मुफ्त खाद्यान्न योजना का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है और गरीब परिवारों की बेटियों की शिक्षा तथा विवाह के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सामूहिक विवाह योजना, रोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, डिजिटल इंडिया और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे धनराशि पहुंचाने से पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिली है।

मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा और सम्मान को शासन की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

रामलीला समिति ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

कार्यक्रम में श्री श्री आर्यनगर रामलीला समिति के अध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने रामलीला मैदान और मंच को सुरक्षित तथा संसाधन संपन्न बनाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह और प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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