मेरठ। रात का सन्नाटा हो या दिन की तपती सड़क… कंधे पर कांवड़ और कदमों में रफ्तार लिए शिवभक्त शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ की तरफ आने वाली डाक कांवड़ की टोलियां इन दिनों कांवड़ मार्ग पर खास आकर्षण बनी हुई हैं। कहीं युवाओं की टोली घंटों लगातार दौड़कर गंतव्य की ओर बढ़ रही है तो कहीं विशाल और आकर्षक झांकियों से सजी कांवड़ श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही है। इसी क्रम में एक भव्य धार्मिक कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें विशाल शिव स्वरूप के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा, नंदी और विभिन्न धार्मिक प्रतीकों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कांवड़ की भव्यता ऐसी है कि रास्ते से गुजरने वाले लोग कुछ पल ठहरकर इसे देखने और मोबाइल कैमरे में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।
दौड़ते कदमों के बीच भव्य कांवड़ ने खींचा ध्यान
डाक कांवड़ यात्रा सामान्य कांवड़ यात्रा से अलग होती है। जहां सामान्य कांवड़िए कई दिनों में अपनी यात्रा पूरी करते हैं, वहीं डाक कांवड़िए बेहद कम समय में हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचने का संकल्प लेकर दौड़ते हैं। कई युवा 8 से 10 घंटे के भीतर हरिद्वार से मेरठ तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इन टोलियों में युवाओं की ऊर्जा देखते ही बनती है। कंधे पर कांवड़, पैरों में रफ्तार और जुबां पर ‘हर हर महादेव’ का जयघोष उनके उत्साह को लगातार बनाए रखता है।
दो महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी
डाक कांवड़ लेकर चलने वाले युवाओं की तैयारी सावन शुरू होने से करीब दो महीने पहले ही शुरू हो जाती है। सुबह की दिनचर्या में दौड़ और व्यायाम शामिल हो जाता है। धीरे-धीरे दौड़ की दूरी और समय बढ़ाया जाता है, ताकि शरीर कई घंटे तक लगातार रफ्तार बनाए रखने के लिए तैयार हो सके।अलवर डाक कांवड़ लेकर जा रहे राहुल चौधरी के मुताबिक दौड़ का अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। वहीं जयराम बताते हैं कि खानपान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। तला-भुना भोजन कम करके पौष्टिक आहार और पर्याप्त पानी पर जोर दिया जाता है। एटा निवासी आशुतोष कहते हैं कि डाक कांवड़ियों का लक्ष्य साफ होता है—हरिद्वार पहुंचना, गंगाजल उठाना और तय समय में अपने शिवालय पहुंचकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करना।
25 से 45 युवाओं की टोली, हर सदस्य की अपनी जिम्मेदारी
डाक कांवड़ की सबसे बड़ी खासियत इसकी सामूहिकता और टीम भावना है। एक दल में करीब 25 से 45 युवा शामिल होते हैं। कोई आगे रहकर गति बनाए रखता है तो कोई पीछे चल रहे साथियों का हौसला बढ़ाता है। पूरी टोली एक-दूसरे की रफ्तार के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ती है। यही वजह है कि डाक कांवड़ सिर्फ दौड़ नहीं बल्कि एकता, अनुशासन और सामूहिक संकल्प की यात्रा भी बन जाती है। मंजिल तक पहुंचना किसी एक सदस्य की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी टोली के संकल्प की जीत होती है।
विशाल शिव स्वरूप, गणेश जी और नंदी ने बढ़ाई भव्यता
कांवड़ मार्ग पर दिखाई दे रही इस विशेष कांवड़ में विशाल आकार में भगवान शिव का स्वरूप बनाया गया है। शिव स्वरूप के सामने भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जबकि नीचे नंदी की आकर्षक प्रतिमा दिखाई दे रही है। धार्मिक प्रतीकों और रंग-बिरंगी सजावट ने कांवड़ को और भव्य रूप दिया है। कांवड़ के साथ तिरंगे भी लगाए गए हैं, जिससे शिवभक्ति के साथ राष्ट्रप्रेम का भाव भी नजर आता है। इस भव्य प्रस्तुति को देखने के लिए राहगीर रुकते रहे और कई लोगों ने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाए।
400 किलोमीटर की दूरी भी संकल्प के आगे छोटी
डाक कांवड़ियों के लिए लंबी दूरी और कठिन रास्ता बड़ी चुनौती होती है। हरिद्वार से अलवर तक करीब 400 किलोमीटर की दूरी को लगभग 22 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखने वाली टोलियां लगातार अभ्यास और अनुशासन के दम पर आगे बढ़ती हैं। लगातार दौड़ने से शरीर थकता है, पैर जवाब देने लगते हैं और सांसों की रफ्तार बढ़ जाती है। लेकिन टोली में जैसे ही कोई ‘हर हर महादेव’ का जयघोष करता है, बाकी शिवभक्त भी उसी ऊर्जा के साथ आवाज मिलाते हैं और कदम फिर तेज हो जाते हैं।
भक्ति, अनुशासन और रचनात्मकता का संगम
डाक कांवड़ यात्रा में जहां युवाओं का अद्भुत शारीरिक अनुशासन देखने को मिल रहा है, वहीं भव्य धार्मिक झांकियों और अनोखी कांवड़ों ने इसकी खूबसूरती को और बढ़ा दिया है। विशाल शिव स्वरूप, गणेश जी और नंदी से सजी यह कांवड़ इसी रचनात्मकता की मिसाल है। मेरठ के कांवड़ मार्गों पर इन दिनों एक तरफ दौड़ते शिवभक्तों की टोली दिखाई दे रही है तो दूसरी ओर भव्य कांवड़ों और झांकियों को देखने के लिए उमड़ती भीड़ नजर आ रही है। हर तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष गूंज रहे हैं। मंजिल पर पहुंचकर जब हरिद्वार से लाया गया गंगाजल भोलेनाथ को अर्पित होता है तो घंटों की दौड़, थकान और रास्ते की मुश्किलें पीछे छूट जाती हैं। यही डाक कांवड़ की असली पहचान है—कदम दौड़ते हैं, टोली साथ चलती है और मन में सिर्फ एक मंजिल रहती है… भोलेनाथ का जलाभिषेक।