लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क हादसों और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के विजन के तहत उत्तर प्रदेश में Zero Fatality District (ZFD) योजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत दुर्घटना बाहुल्य स्थानों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर हादसों के मूल कारणों को दूर करने और प्रभावी प्रवर्तन पर जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में ZFD योजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और ZFD नोडल अधिकारियों ने भाग लिया।
8 महीने में 1,107 लोगों की बची जान
ZFD योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच ZFD से आच्छादित स्थानों पर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत, मृतकों में 8.03 प्रतिशत और घायलों में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं, जबकि 1,107 मानव जीवन बचाने में सफलता मिली। आंकड़ों के मुताबिक औसतन हर दिन करीब 7 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और करीब 5 लोगों की जान बची।
‘हादसे को महज संयोग न मानें, कारण तलाशें’
कार्यशाला को संबोधित करते हुए यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल आकस्मिक घटना मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रत्येक हादसे के पीछे मौजूद कारणों की पहचान करना और उन्हें दूर करना जरूरी है।
उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में दुर्घटना संभावित स्थानों और हादसों के कारणों की पहचान कर मिशन मोड में रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना की रोकथाम और उसकी विवेचना दोनों विशेषज्ञता वाले कार्य हैं। इसलिए टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी के साथ काम करना होगा। संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर चिन्हित कमियों के समाधान का फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जाए।
हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम पर जोर
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की जिम्मेदारी दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है। हादसे को रोकना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके कारणों की समीक्षा कर यह पता लगाने को कहा गया कि व्यवस्था में कौन सी कमी हादसे की वजह बनी। इसके साथ ही भविष्य में उसी तरह की दुर्घटना दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सड़क सुरक्षा उपायों, प्रभावी प्रवर्तन और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के साथ तय प्रक्रिया का लगातार पालन करने पर भी जोर दिया।
‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’
ZFD योजना ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत दुर्घटना बाहुल्य स्थानों की वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर पहचान की जा रही है। चिन्हित स्थानों पर लक्षित प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और सड़क अभियांत्रिकी से जुड़ी कमियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटना होने के बाद केवल राहत या कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसे स्थानों की पहचान कर पहले से जरूरी कदम उठाना है, जहां हादसों की आशंका अधिक रहती है।
59 जिलों में 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें सक्रिय
कार्यशाला में 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और ZFD नोडल अधिकारी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने टीमों को सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट की पहचान, प्राथमिक उपचार और CPR समेत विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया।
तकनीक और प्रशिक्षण से मजबूत होगी सड़क सुरक्षा
कार्यशाला में दुर्घटनाओं की रोकथाम और जांच में विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को उपलब्ध तकनीकी एवं अन्य संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने तथा जरूरी प्रशिक्षण हासिल करने के निर्देश दिए गए।
सरकार और पुलिस का लक्ष्य है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर सुधार किए जाएं और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया जाए। ZFD योजना के आंकड़े संकेत देते हैं कि लक्षित हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि को कम किया जा सकता है।