लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन किया। ‘उत्तर प्रदेश इंटू ए ग्लोबल टेक्सटाइल हब’ थीम पर आयोजित कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी वस्त्र परंपरा से लेकर आधुनिक टेक्निकल टेक्सटाइल और निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से बात रखी। इस दौरान उन्होंने 2017 से पहले और आज के उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और औद्योगिक माहौल का तुलनात्मक चित्र भी पेश किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले निवेशक कारोबार का सपना लेकर यूपी आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौटता था। हर तीसरे दिन बड़े दंगे होते थे, महीनों कर्फ्यू रहता था और बाजार, स्कूल-कॉलेज तक बंद हो जाते थे। ऐसे माहौल में उद्योग लगाना किसी दिवास्वप्न से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि उस दौर में माफिया खुलेआम जीप में पिस्टल लहराते घूमते थे और प्रदेश में समानांतर सरकारें चलती थीं।
योगी ने कहा कि आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश कर्फ्यू मुक्त, दंगा मुक्त, माफिया मुक्त और उपद्रव मुक्त प्रदेश बन चुका है। बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस करने वालों के लिए ‘जेल या जहन्नुम’ ही जगह है।
5,196 करोड़ के निवेश प्रस्तावों के एमओयू
टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना और यूपी टेक्स मित्र पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही 5,196 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यूपी का मतलब ‘अप’ और ‘अप’ का मतलब अनलिमिटेड पोटेंशियल है।
हजारों साल पुरानी है यूपी की टेक्सटाइल विरासत
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पहचान आज की नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुरानी है। वाराणसी के वस्त्र और रेशम की चर्चा वैदिक साहित्य में मिलती है। ‘हिरण्य वस्त्र’ यानी सोने के तारों से बुने जरी और जरदोजी के वस्त्रों का उल्लेख भी मिलता है।
उन्होंने कहा कि रामायण और महाभारत में भी काशी के रेशमी और सूती वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में वस्त्र निर्माण की परंपरा प्राचीन काल से ही समृद्ध रही है। भारत और यूपी में बने वस्त्रों की मांग विदेशों में भी थी और रोम-ग्रीस तक इनकी पहुंच रही।
वाराणसी की साड़ी से मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स तक बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में टेक्सटाइल और उससे जुड़े उद्योगों की बड़ी संभावनाएं हैं। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, कानपुर का टेक्सटाइल-लेदर एवं इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, आगरा का अपैरल, सीतापुर का टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग और मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स व टेक्निकल टेक्सटाइल प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को दर्शाते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब दो लाख हैंडलूम वीवर और पांच लाख से अधिक पावरलूम वीवर हैं। फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में यूपी देश में तीसरे स्थान पर है और देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 13 से 14 प्रतिशत है।
छह साल में टेक्सटाइल और हस्तशिल्प निर्यात 56 फीसदी बढ़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक वस्त्र उद्योग में बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है। उत्तर प्रदेश ने भी अपनी पारंपरिक विरासत को आधुनिक तकनीक, निवेश, नवाचार और वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में यूपी के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदेश इस क्षेत्र में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।
सीएम ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर रहा। अब इस मॉडल को दूसरे जिलों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ODOP से 35 से ज्यादा जिलों के टेक्सटाइल उत्पादों को पहचान
योगी ने कहा कि ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना के जरिए टेक्सटाइल सेक्टर में 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। इन उत्पादों की ब्रांडिंग, गुणवत्ता, डिजाइन, बाजार और निर्यात क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट, गारमेंट से ब्रांड और ब्रांड से ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करनी होगी। यूपी इस पूरी वैल्यू चेन का वैश्विक केंद्र बनने के लिए तैयार है।
2017 से पहले ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ की पहचान थी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ प्रदेश की पहचान बन चुकी थी। हत्या, फिरौती, कब्जा, गुंडा टैक्स और अपहरण का उद्योग फल-फूल रहा था।
उन्होंने कहा कि उस समय न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। माफिया जिस जमीन पर हाथ रख देता था, उसे अपना समझता था। सरकार इनके सामने मौन बनी रहती थी।
योगी ने कहा कि उस दौर में यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग किराये पर मकान और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। पर्व-त्योहारों से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था और कई क्षेत्रों में लंबे समय तक कर्फ्यू लगा रहता था।
‘जहां सड़क खराब और शाम होते ही अंधेरा, वहीं यूपी की सीमा’
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी को लेकर यह धारणा बन गई थी कि जहां सड़कें खराब हो जाएं और शाम होते ही अंधेरा शुरू हो जाए, वहीं से यूपी की सीमा शुरू हो जाती है।
उन्होंने कहा कि बिजली की व्यवस्था भी एक परिवार और सिंडिकेट तक सीमित मानी जाती थी। उद्योगों के अनुकूल नीतियों का अभाव था। 2017 में जब उनकी सरकार आई तो बमुश्किल एक औद्योगिक नीति थी, लेकिन निवेशक उसमें भी निवेश करने को तैयार नहीं थे।
उन्होंने कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी अराजक व्यवस्था की शिकार हुईं। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों के लिए बैंक से ऋण हासिल करना मुश्किल था और डीबीटी की व्यवस्था नहीं होने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था।
नौ साल में 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान यूपी में औद्योगिक माहौल तेजी से बदला है। प्रदेश में अब 36 अलग-अलग सेक्टरों के लिए सेक्टोरल पॉलिसी हैं। पिछले नौ वर्षों में करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। सरकार ने प्रत्येक एमएसएमई के लिए पांच लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी की गारंटी भी रखी है। यूपी में देश की सबसे अधिक करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में होने वाले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का 60 प्रतिशत उत्पादन यूपी में हो रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह स्ट्रेटेजिक नोड्स में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
टेक्सटाइल अब धागे और कपड़े तक सीमित नहीं
योगी ने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। टेक्निकल टेक्सटाइल विज्ञान और तकनीक के संगम से उभरता हुआ रणनीतिक और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है।
डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यूपी को पारंपरिक टेक्सटाइल के साथ आधुनिक टेक्निकल टेक्सटाइल पर भी तेजी से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पास मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस, एमएसएमई नेटवर्क, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम तथा दुनिया का बड़ा घरेलू बाजार है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार करना है, जहां निवेशकों को पूरी वैल्यू चेन एक ही इकोसिस्टम में मिले।
पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के तहत वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में भूमि चिन्हित कर आरक्षित की गई है।
वहीं सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की कार्रवाई शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
योगी ने कहा कि जहां बुनाई की परंपरा है वहां आधुनिक वीविंग और डिजाइन पहुंचे, जहां गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग की संभावना है वहां गारमेंट क्लस्टर विकसित हों और हस्तशिल्प वाले क्षेत्रों में डिजाइन, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट सपोर्ट उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि अब यूपी के एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर अपने उत्पादों के ब्रांड ओनर बनें।
‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी, एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी एंड एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के माध्यम से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, कानपुर जैसे संस्थान युवाओं को आधुनिक टेक्सटाइल उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। वाराणसी की साड़ी, भदोही की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी और बरेली की जरी केवल शिल्प नहीं, बल्कि यूपी की सांस्कृतिक पूंजी हैं।
टेक्सटाइल विरासत को आर्थिक ताकत में बदलना होगा
समापन संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलने के लिए मिलकर काम करना होगा। कॉन्क्लेव में मिले उपयोगी सुझावों को प्रदेश की टेक्सटाइल पॉलिसी का हिस्सा बनाकर लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट है—बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवा का रोजगार और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना। यूपी आज पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट के स्तर पर टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तैयार है।
कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर समेत टेक्सटाइल सेक्टर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।