लखनऊ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कथित गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच में मतदाता पहचान पत्र यानी ईपीआईसी (EPIC) नंबर से जुड़ी विसंगतियों की पुष्टि होने के बाद संबंधित निर्वाचन अधिकारियों और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता सूची की गहन जांच कराने और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस ने दावा किया कि जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके ईपीआईसी और क्रम संख्या पहले जैसी ही रहीं। पार्टी ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की थी। समाजवादी पार्टी ने भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया था। ये आरोप हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।
दो एसडीएम हटाए गए, ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त
मामले में पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को निर्वाचन कार्य से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध किए जाने की खबर है। वहीं, वीआरसी के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। निर्वाचन विभाग ने सहायक निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही की भी रिपोर्ट मांगी है।
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव होने पर संबंधित मतदाता को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। पार्टी ने दावा किया कि कुछ ऐसे मतदाताओं के नाम भी हटाए गए, जो अब भी संबंधित क्षेत्र में रहते हैं, जबकि कुछ ऐसे नाम जोड़े गए जिनके बारे में पार्टी ने क्षेत्र में निवास नहीं करने का आरोप लगाया। इन दावों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
पीलीभीत सदर सीट का मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह गंगवार ने यह सीट करीब 6,970 मतों के अंतर से जीती थी। हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव परिणाम के बीच किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
12 नवंबर को प्रकाशित होगा मतदाता सूची का आलेख्य
इसी बीच निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 को लेकर अधिकारियों के तबादलों पर भी रोक लगाई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों का मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन तक आयोग की पूर्व अनुमति के बिना स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी समेत पुनरीक्षण से जुड़े पदों को रिक्त भी नहीं रखा जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 12 नवंबर 2026 को होगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक नाम जोड़ने, हटाने या विवरण में संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
निर्वाचन विभाग का जोर इस बात पर है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो, पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहें और अपात्र नाम शामिल न हों। पीलीभीत प्रकरण की विस्तृत जांच और प्रदेशव्यापी सत्यापन रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि गड़बड़ियां कितनी व्यापक हैं और जिम्मेदारी किन अधिकारियों या कर्मचारियों की तय होती है।