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पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम योगी की तीन बड़ी घोषणाएं, दरोगा-इंस्पेक्टर से सिपाही तक बढ़ेंगे भत्ते

लखनऊ। पुलिस स्मृति दिवस-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों के भत्तों में बढ़ोतरी की तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित स्मृति परेड के दौरान मुख्यमंत्री ने फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षकों और निरीक्षकों का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह करने का ऐलान किया। प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) संवर्ग के अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जाएगा। वहीं, फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों का सिम भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कर्तव्यपालन के दौरान बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीदों को नमन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीदों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके प्रति राष्ट्र का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी और कर्तव्यनिष्ठा कानून का राज स्थापित करने की आधारशिला है।

विजयादशमी पर जब देश उत्सव मना रहा था, पुलिसकर्मी निभा रहे थे ड्यूटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बच्चे का सुरक्षित विद्यालय पहुंचना, किसी बेटी का निर्भय होकर घर से बाहर निकलना, किसी व्यापारी का बिना भय कारोबार करना और संकट में नागरिक को सहायता मिलना सामान्य घटनाएं लग सकती हैं। लेकिन इनके पीछे पुलिसकर्मियों का निरंतर परिश्रम, सतर्कता और दायित्वबोध होता है।

उन्होंने कहा कि जब पूरा देश विजयादशमी का उत्सव मना रहा था, परिवार खुशियां बांट रहे थे और जगह-जगह रावण के पुतले जलाए जा रहे थे, तब पुलिसकर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रहे थे, ताकि नागरिक निर्भय होकर त्योहार मना सकें। शहीदों के नाम केवल स्मारकों पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की नैतिक चेतना में भी अंकित रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कर्तव्य और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच कठिन चुनाव की घड़ी आई, तब वीर पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। उनका साहस समाज को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।

हॉट स्प्रिंग की घटना से जुड़ा है पुलिस स्मृति दिवस

पुलिस स्मृति दिवस के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 जवानों ने चीनी सैनिकों के हमले का सामना करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उन्हीं की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ओर से आजाद हिंद सरकार की स्थापना का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर स्वतंत्रता के संकल्प का इतिहास है, तो दूसरी ओर राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान की गाथा। दोनों घटनाएं त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती हैं।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। इसका उद्देश्य पुलिस बलों के गौरवशाली इतिहास, साहस और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शहीद के पीछे एक परिवार, सपने और भविष्य की योजनाएं होती हैं, लेकिन कर्तव्य की पुकार आने पर उन्होंने राष्ट्र और समाज की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।

पहले अपराधियों पर कार्रवाई करने से डरते थे पुलिस अधिकारी: सीएम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में पुलिस अधिकारी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले दबाव महसूस करते थे और कार्रवाई होते ही सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कई बार अपराधियों के बजाय कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर ही कार्रवाई हो जाती थी।

उन्होंने कहा कि उस समय पुलिसकर्मियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम करना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने थानों की जर्जर बैरकों, पुराने हथियारों और पीएसी की कंपनियों को बंद करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के समानांतर प्रभाव के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी।

मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस नीति की आलोचना करने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों और बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है।

2012 से 2017 के बीच 815 दंगों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 815 दंगे हुए थे। उनके अनुसार, दंगों का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गरीबों की दुकानों, मजदूरों की रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता है।

उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव को अपने प्राण गंवाने पड़े थे। मुख्यमंत्री ने इस घटना को कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चुनौती के रूप में पेश किया।

2017 के बाद पुलिस को कार्रवाई की स्वतंत्रता देने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद पुलिस को अपराधियों, माफिया और दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की स्वतंत्रता दी गई। उन्होंने कहा कि गरीबों, पीड़ितों, व्यापारियों और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, जबकि समाज में आतंक फैलाने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में माफिया तत्वों की 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रयागराज में 602 फ्लैटों के निर्माण के लिए भूमि पूजन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में सुधार से निवेश और कारोबारी गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को उपद्रव से उत्सव की ओर बढ़ने वाला राज्य बताया।

सात शहरों में कमिश्नरेट, प्रशिक्षण क्षमता 60 हजार हुई

मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस एक बार में करीब छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने में सक्षम थी। अब प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाकर 60 हजार कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2.26 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और 35 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पुलिस में महिला कार्मिकों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 45 हजार हो गई है।

उन्होंने कुशल खिलाड़ी योजना के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल पदक विजेता खिलाड़ियों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एशियन गेम्स में एथलेटिक्स की पारुल चौधरी, कबड्डी के अर्जुन देशवाल, क्रिकेट की दीप्ति शर्मा और हॉकी के राजकुमार पाल जैसे खिलाड़ियों ने खेल के क्षेत्र में देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर लखनऊ में आधुनिक फॉरेंसिक संस्थान का निर्माण किया गया है। उन्होंने प्रत्येक जनपद में साइबर थाने और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे साइबर अपराधों की शिकायतों, जांच और पीड़ितों की सहायता में मदद मिलती है।

उन्होंने आतंकवाद, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, पेपर लीक, जहरीली शराब और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता और अपराध के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।

महिला पीएसी बटालियनों का गठन और पुलिसकर्मियों के कल्याण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीएसी की बंद कंपनियों को पुनर्जीवित किया है। साथ ही वीरांगना ऊदा देवी पासी, वीरांगना झलकारी बाई कोरी और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर तीन महिला पीएसी बटालियनों का गठन किया गया है। उनके अनुसार, इससे महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी बढ़ाने और पुलिस बल की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए सैलरी पैकेज के तहत पांच लाख कैशलेस हेल्थ कार्ड बनाए जाने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं, स्वास्थ्य सुरक्षा और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से अपने दायित्व निभा सकें।

नई न्याय संहिताओं का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में औपनिवेशिक दौर के कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप न्याय व्यवस्था को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने पुलिस शहीदों के सम्मान और स्मृति को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का सम्मान किसी राजनीतिक विचार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का विषय है।

एक साल में देश के 154 पुलिसकर्मी बलिदान, यूपी के छह शामिल

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्यपालन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। इनमें उत्तर प्रदेश के छह पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन्होंने उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी अशोक कुमार, आरक्षी प्रदीप कुमार, फायर सर्विस चालक वीरपाल सिंह और फायरमैन मोहित कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद अपराध के विरुद्ध अभियानों में उत्तर प्रदेश के 18 पुलिसकर्मी बलिदान दे चुके हैं, जबकि 1,953 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार को इस वर्ष मरणोपरांत राष्ट्रपति वीरता पदक प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस सैलरी पैकेज के अंतर्गत शहीदों के आश्रितों को अब तक 425 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों का सम्मान और उनकी सहायता सरकार का दायित्व है।

कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक पीएसी आलोक सिंह, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा शहीद परिवारों के परिजन उपस्थित रहे।

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